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    बाजार

    भारत शेयर बाजार पूंजीकरण रैंकिंग में फिसलकर सातवें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि दक्षिण कोरिया आगे निकला। इसके अलावा, दक्षिण कोरिया का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर पांच ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया। वहीं, भारत का बाजार मूल्य घटकर लगभग 4.8 ट्रिलियन डॉलर पर सिमट गया है। पिछले सप्ताह ताइवान ने भी भारत को पीछे छोड़ा था, जिससे प्रतिस्पर्धा और तेज हुई। इस तरह लगातार दो सप्ताह में दो एशियाई बाजार भारत से आगे निकल गए हैं। नतीजतन, निवेशकों के बीच भारतीय बाजार की स्थिति को लेकर नई चिंताएं उभर रही हैं।

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    बाजार में एआई और सेमीकंडक्टर बूम का असर

    दूसरी ओर, ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों ने वर्ष 2026 में शानदार प्रदर्शन दर्ज किया। विशेष रूप से, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक इस वर्ष अब तक 110 फीसदी उछला।इसी दौरान, ताइवान का बाजार भी लगभग 65 फीसदी की मजबूत बढ़त हासिल कर गया। दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों में निवेश ने तेजी को बढ़ावा दिया है। इसके परिणामस्वरूप, दोनों देशों की प्रमुख कंपनियों ने मुनाफे और बाजार मूल्य में वृद्धि दर्ज की। यही कारण है कि वैश्विक निवेशकों ने इन बाजारों में लगातार दिलचस्पी दिखाई है। इसके विपरीत, भारतीय शेयर बाजार कई आर्थिक और वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, फिर भी निवेशकों का भरोसा दबाव में दिखाई देता। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार भावनाओं और व्यापार संतुलन पर असर डाला।

    साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार में कमजोरी बढ़ाई है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ाई। फलस्वरूप, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। विश्लेषकों के अनुसार, ऊंचे वैल्यूएशन और कंपनियों की सुस्त कमाई भी दबाव बढ़ा रही है। वहीं, वैश्विक व्यापार तनाव और मध्यपूर्व संघर्ष ने अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। इसके कारण कच्चे माल की लागत बढ़ी और कई उद्योगों की लागत संरचना प्रभावित हुई। साथ ही, आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों ने कंपनियों के परिचालन खर्च को बढ़ाया है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ सुधार की उम्मीद जता रहे हैं, लेकिन चुनौतियां अभी बरकरार हैं। फिलहाल, भारतीय बाजार की रिकवरी वैश्विक परिस्थितियों और निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी।

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