अरुणाचल की PPA ने टक्सिंग इलाके में चीनी PLA सैनिकों की कथित घुसपैठ का आरोप लगाया है। पार्टी ने जमीनी हालात की जानकारी जुटाने के लिए चार सदस्यीय तथ्य-खोज समिति बनाई है। समिति में पूर्व मंत्री काहफा बेंगिया, उपाध्यक्ष कालिंग जेरांग, सचिव सोरंग किओकम और नराह जिमी शामिल हैं। समिति ने टक्सिंग, माज़ा और गैलेमो के स्थानीय निवासियों से बातचीत करके हालात समझने प्रयास किए। सदस्यों ने क्षेत्र में तैनात वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों और भारतीय सेना के जवानों से बातचीत की। PPA ने अपनी रिपोर्ट में सीमा क्षेत्र के कमजोर बुनियादी ढांचे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पार्टी ने सीमावर्ती इलाकों में तेज सड़क निर्माण और स्थायी सैन्य शिविर बनाने की मांग की।
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PLA की कथित गतिविधियों और चीन के दावे पर बढ़ा विवाद
PPA ने बेहतर संचार व्यवस्था विकसित करने और सीमा क्षेत्रों में कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर दिया। पार्टी के अनुसार, स्थानीय लोगों की आवाजाही शेरा पांच और नांगा पहाड़ क्षेत्रों में सीमित हुई। हालांकि, अरुणाचल सरकार और भारतीय सेना ने जमीन कब्जे से जुड़े इन दावों को खारिज किया है। समिति ने कहा कि भारतीय सुरक्षा बल पूरे वर्ष क्षेत्र में नियमित गश्त करते हैं।
खराब मौसम और भारी बारिश के कारण गश्त अप्रैल से अक्टूबर तक अधिक होती है। समिति ने शेरा पांच से जुड़ी पुरानी घटना का भी उल्लेख अपनी रिपोर्ट में किया। एक स्थानीय युवक ने समिति को भारतीय क्षेत्र में PLA और अरुणाचल स्काउट्स के आमने-सामने आने की जानकारी दी। समिति ने दावा किया कि भारतीय सैनिक 2023 में शेरा पांच से हट गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद भारतीय सैनिक उस स्थान पर दोबारा वापस नहीं लौटे। समिति ने आरोप लगाया कि बाद में PLA सैनिक शेरा पांच क्षेत्र में फिर पहुंचे। उसने दावा किया कि PLA सैनिकों ने भारतीय गश्ती दल की छोड़ी निशानियां वहां से हटा दीं। भारत ने हाल में अरुणाचल प्रदेश के 27 भौगोलिक स्थानों के मानकीकृत नाम जारी किए हैं। चीन ने इन नामों पर आपत्ति जताते हुए अरुणाचल प्रदेश को जांगनान क्षेत्र का हिस्सा बताया है।
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