भारत की वुशू खिलाड़ी रोशिबिना देवी नाओरेम ने एशियन गेम्स में लगातार तीसरी बार पदक जीता। महिलाओं के 60 किग्रा सांडा फाइनल में रोशिबिना को चीन की झांग शियाओयू से हार मिली। झांग ने मुकाबले के दोनों राउंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए 5-0 की बढ़त बनाई। चीनी खिलाड़ी ने दोनों राउंड 5-0 से जीतकर मुकाबला 10-0 के स्कोर से अपने नाम किया। रोशिबिना ने फाइनल तक पहुंचने के दौरान लगातार मजबूत प्रदर्शन करके भारत की उम्मीदें बढ़ाईं। हालांकि, निर्णायक मुकाबले में उन्हें झांग के आक्रामक खेल का सामना करना पड़ा। झांग ने शुरुआत से ही मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा और रोशिबिना को अंक नहीं लेने दिए। भारतीय खिलाड़ी ने वापसी की कोशिश की, लेकिन झांग ने अपनी बढ़त लगातार मजबूत रखी। दूसरे राउंड में भी चीन की खिलाड़ी ने आक्रामक रणनीति जारी रखी और मुकाबला अपने पक्ष में किया।
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लगातार तीसरे एशियन गेम्स में रोशिबिना का पदक, भारत को मिला सिल्वर
इस हार के बावजूद रोशिबिना ने एशियन गेम्स में भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। उन्होंने लगातार तीसरे एशियन गेम्स में पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित की। इससे पहले रोशिबिना ने 2018 एशियन गेम्स में कांस्य पदक अपने नाम किया था। इसके बाद उन्होंने 2023 में सिल्वर मेडल जीतकर अपने प्रदर्शन को और बेहतर किया। अब उन्होंने एक और सिल्वर पदक जीतकर अपने पदकों की संख्या बढ़ाई है। रोशिबिना के लगातार पदक भारतीय वुशू के लिए भी अहम उपलब्धि माने जा रहे हैं। फाइनल में हार के बावजूद उनका प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में चर्चा में रहा। उन्होंने कठिन मुकाबलों में बेहतर खेल दिखाते हुए फाइनल में जगह बनाई।
झांग ने फाइनल में दबाव बनाए रखा और भारतीय खिलाड़ी को स्कोर करने का मौका नहीं दिया। दोनों राउंड में समान 5-0 के स्कोर ने मुकाबले की तस्वीर साफ कर दी। रोशिबिना ने रजत पदक के साथ प्रतियोगिता का अभियान समाप्त किया। उनके लगातार पदक भारत के लिए एशियन गेम्स में वुशू की मजबूत मौजूदगी दर्शाते हैं। इस उपलब्धि के साथ रोशिबिना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी निरंतरता कायम रखी। भारतीय खेल प्रशंसकों की नजरें अब उनके अगले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर रहेंगी। रोशिबिना के प्रदर्शन ने भारतीय वुशू टीम को एक और अहम पदक दिलाया। झांग ने स्वर्ण पदक जीतकर फाइनल में अपना दबदबा कायम किया। वहीं, रोशिबिना ने रजत पदक के साथ भारत का सम्मान बढ़ाया। एशियन गेम्स में उनका लगातार तीसरा पदक उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि बन गया।
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