सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना को ‘इंडिया गॉट लेटेंट’ मामले में बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। यह मामला शो के दौरान दिव्यांग व्यक्तियों पर की गई कथित असंवेदनशील टिप्पणियों से जुड़ा था, जिसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में शिकायतें दर्ज हुई थीं। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि रैना और अन्य आरोपियों ने अदालत के निर्देशों का पालन किया और दिव्यांगों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सकारात्मक पहल की। अदालत ने इस आधार पर उनके खिलाफ चल रही सभी कानूनी कार्रवाइयों को समाप्त करने का आदेश दिया।
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समय रैना के खिलाफ सभी FIR रद्द
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने यह माना कि समय रैना और अन्य संबंधित व्यक्तियों ने दिव्यांगों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए तथा उनके हित में धन जुटाने के प्रयास किए। न्यायालय ने कहा कि इन पहलों ने समाज में सकारात्मक संदेश दिया है और इससे दिव्यांग समुदाय के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद मिली है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति अपनी गलती से सीखकर रचनात्मक दिशा में कार्य करता है, तो उसके प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
इस मामले में समय रैना के अलावा कॉमेडियन विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर (सोनाली आदित्य देसाई) और निशांत जगदीश तंवर को भी राहत मिली। अदालत ने इन सभी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझा और सकारात्मक कार्यों के माध्यम से बदलाव लाने का प्रयास किया। बेंच ने टिप्पणी की कि सच्चे प्रयास हमेशा अच्छे परिणाम देते हैं और युवा प्रतिभाओं को सही दिशा में आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। अदालत ने यह भी उम्मीद जताई कि ये कलाकार भविष्य में सामाजिक मुद्दों के प्रति अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट ने प्रयासों की सराहना की
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि वह इस मामले से जुड़े व्यापक मुद्दों पर विचार करना जारी रखेगा। अदालत ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों और संबंधित संगठनों से सुझाव लिए जाएंगे ताकि डिजिटल और मनोरंजन मंचों पर प्रसारित होने वाले कंटेंट की बेहतर निगरानी के उपाय तैयार किए जा सकें। न्यायालय इस विषय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए आगे भी सुनवाई करेगा। इसका उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन स्थापित करना है, जिससे किसी भी वर्ग की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 6 से 10, जिनमें आरोपी कॉमेडियन शामिल थे, के खिलाफ सभी आपराधिक मामलों को समाप्त करने की घोषणा की। अदालत ने कहा कि संबंधित सभी कार्यवाहियां भी रद्द की जाती हैं। साथ ही, न्यायालय ने यह संकेत दिया कि वह भविष्य में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने पर विचार करेगा। इस फैसले ने समय रैना और अन्य कलाकारों को कानूनी राहत दी, वहीं समाज में संवेदनशील और जिम्मेदार अभिव्यक्ति को लेकर एक नई चर्चा भी शुरू कर दी।

