नई दिल्ली: भारतीय सेना और वायुसेना अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करने के लिए स्वदेशी रक्षा उपकरणों की खरीद पर जोर दे रही हैं। इसी कड़ी में दोनों सेनाएं पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों की जगह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के लगभग 200 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) शामिल करने की योजना बना रही हैं। ये आधुनिक हेलीकॉप्टर दुर्गम इलाकों में सैनिकों और सैन्य उपकरणों को पहुंचाने के साथ निगरानी तथा सामरिक अभियानों में भी मदद करेंगे। स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की खरीद से सेना की परिचालन क्षमता बढ़ेगी और भारत के रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।
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400 हल्के हेलीकॉप्टरों की जरूरत
भारतीय सशस्त्र बलों को करीब 400 हल्के हेलीकॉप्टरों की जरूरत है। सेना और वायुसेना इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल खासतौर पर हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों और चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर करेंगी। इन इलाकों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सैनिकों और जरूरी सैन्य सामान की आवाजाही चुनौतीपूर्ण रहती है। हल्के हेलीकॉप्टर इन चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे पहले रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 200 लाइट मल्टीरोल हेलीकॉप्टर (LMRH) की खरीद को मंजूरी दी थी। अब सेना खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इन स्वदेशी प्लेटफॉर्म को शामिल करने से पुराने हेलीकॉप्टरों पर निर्भरता घटेगी और विदेशी उपकरणों की खरीद पर भारत का खर्च कम करने में मदद मिलेगी।
भारतीय सेना अपनी आर्टिलरी क्षमता बढ़ाने के लिए 335 K9 वज्र-T सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोपें खरीदने की योजना भी बना रही है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने इन तोपों की खरीद को मंजूरी दी है। फिलहाल सेना के पास K9 वज्र-T की पांच रेजिमेंट हैं। सेना इन तोपों का इस्तेमाल रेगिस्तानी इलाकों से लेकर ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों तक कर सकती है। इनकी मदद से सैनिक दुश्मन के ठिकानों पर तेजी से गोलाबारी कर सकते हैं और बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुसार अपनी स्थिति भी बदल सकते हैं। अतिरिक्त तोपों को शामिल करने से सेना की मारक क्षमता बढ़ेगी और विभिन्न मोर्चों पर सैन्य अभियानों को प्रभावी समर्थन मिलेगा।
335 K9 वज्र-T तोपें खरीदने की योजना
K9 वज्र-T तोप भारतीय और विदेशी रक्षा तकनीक के सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह दक्षिण कोरियाई कंपनी हानवा की K9 थंडर तकनीक पर आधारित है, जबकि भारत में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) इसका निर्माण करती है। इस तोप में 155 मिमी की 52-कैलिबर बैरल वाली गन लगी है। इसका वजन लगभग 50 टन है। यह तोप तेजी से अपनी पोजिशन बदल सकती है और दुश्मन के ठिकानों पर प्रभावी गोलाबारी कर सकती है। इसकी फायरिंग दर लगभग 6 से 8 गोले प्रति मिनट बताई जाती है, जबकि परिस्थितियों और इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद के आधार पर इसकी मारक दूरी करीब 40 से 50 किलोमीटर तक हो सकती है। बड़ी संख्या में इन तोपों को शामिल करने से सेना की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता मजबूत होगी।
रक्षा मंत्रालय ने सैन्य आधुनिकीकरण के लिए बड़े स्तर पर खरीद योजनाओं को आगे बढ़ाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 26 अक्टूबर को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए 2.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन प्रस्तावों में स्वदेशी रक्षा उपकरणों की खरीद पर विशेष जोर दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल खरीद का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, भारतीय कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे और देश की विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम होगी। हेलीकॉप्टरों और आधुनिक तोपों की खरीद भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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