सुप्रीम कोर्ट ने नीट (NEET) पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत और गिरफ्तारी में लिए गए छात्रों को बड़ी राहत दी। अदालत ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा कि जिन छात्रों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। न्यायालय ने कहा कि केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने सभी संबंधित राज्यों और पुलिस प्रशासन को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इस फैसले से देशभर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और उनके परिवारों को महत्वपूर्ण राहत मिली। अदालत ने कहा कि प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखे, लेकिन निर्दोष छात्रों के अधिकारों की भी पूरी सुरक्षा करे।
NEET प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों को तुरंत रिहा करें
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों को नोटिस जारी किया। अदालत ने सभी राज्यों से पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं पर विस्तृत जवाब मांगा। न्यायालय ने सभी संबंधित स्थानों की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश भी दिया, ताकि भविष्य में जांच के दौरान किसी महत्वपूर्ण साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ न हो। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों की जिम्मेदारी तय करने के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ पहली बार मुकदमा दर्ज किया गया, उनके विरुद्ध फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में जल्दबाजी से बचते हुए कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करे। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और प्रशासन को संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति की हिंसक गतिविधियों में स्पष्ट भूमिका सामने आती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
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सात राज्यों से मांगा जवाब, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश
NEET पेपर लीक विवाद को लेकर पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई राज्यों में छात्रों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी, जिसके बाद कई छात्रों को हिरासत में लिया गया और कुछ को गिरफ्तार भी किया गया। इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गईं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने कई छात्रों के खिलाफ आवश्यकता से अधिक सख्त कार्रवाई की। अदालत ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई शुरू की।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को छात्रों के अधिकारों और निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। न्यायालय अब राज्यों से जवाब मिलने के बाद मामले की अगली सुनवाई करेगा और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे के निर्देश जारी करेगा। इस बीच, सभी संबंधित एजेंसियों को अदालत के आदेशों का पालन करने और जांच प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।


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