ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध के दौरान सोना और चांदी की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट देखने को मिली है, जबकि आमतौर पर ऐसे जियो-पॉलिटिकल तनाव में इनकी मांग बढ़ती है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच अब तक सोना करीब 12,489 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी लगभग 40,000 रुपये प्रति किलो टूट गई है, जिससे विश्लेषक भी हैरान हैं। आईबीजेए के अनुसार, 27 फरवरी 2026 को सोना 1,59,097 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,67,900 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी, और 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है, हालांकि संस्था सप्ताहांत में रेट जारी नहीं करती।
Peter McGuire ने एक इंटरव्यू में कहा कि युद्ध के दौरान तेल कीमतों में उछाल के बीच सबसे चौंकाने वाली गिरावट कीमती धातुओं में देखने को मिली। उन्होंने बताया कि सोना, जो करीब 5,400 डॉलर तक पहुंच गया था, अचानक तेजी से गिरकर लगभग 4,720 डॉलर पर आ गया, जबकि चांदी भी अपने 121 डॉलर के उच्च स्तर से फिसलकर करीब 73 डॉलर तक आ गई। उन्होंने यह भी कहा कि आमतौर पर जियो-पॉलिटिकल तनाव के समय निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोना-चांदी की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस बार बाजार का रुख अलग रहा। उनके मुताबिक, निवेशकों की बदलती रणनीति और वैश्विक आर्थिक कारकों ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है, जिससे कीमतों में यह असामान्य गिरावट देखने को मिली।
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पीटर मैकगायर ने बताई सोना-चांदी की गिरावट की बड़ी वजहें
Peter McGuire ने सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई कारण बताए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 4.36 प्रतिशत तक पहुंचने से निवेशकों ने बेहतर और सुरक्षित रिटर्न के लिए फिक्स्ड इनकम एसेट्स की ओर रुख किया, जिससे कीमती धातुओं से निवेश का प्रवाह कम हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि कच्चे तेल और गैस फ्यूचर्स में तेजी के चलते बड़े निवेशकों और कारोबारियों ने अपनी पूंजी इन सेगमेंट्स में शिफ्ट कर दी। इसके अलावा, बाजार में मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बदलती निवेश रणनीतियों ने भी सोना-चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ाया, जिसके चलते इनके दाम में तेज गिरावट दर्ज की गई।
शेयर बाजारों की कमजोरी ने भी सोना-चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ाया, क्योंकि मार्जिन कॉल का सामना कर रहे कई निवेशकों ने अन्य जगह हुए नुकसान की भरपाई के लिए इन धातुओं में बिकवाली की। इसके साथ ही मजबूत डॉलर ने भी कीमती धातुओं को कमजोर किया। Peter McGuire का मानना है कि अप्रैल से मई के बीच एनर्जी और इक्विटी बाजारों में शुरुआती उत्साह कम होने पर निवेशकों का रुझान फिर से सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में सोना और चांदी की मांग में सुधार के साथ इनके दाम दोबारा बढ़ने की संभावना है।
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