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    बांधवगढ़

    मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ‘पुजारी’ नाम के 8 वर्षीय बाघ की मौत से वन विभाग में हलचल मच गई है। बाघ का शव रिजर्व क्षेत्र के जंगल में मिला, जिसके बाद अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह मामला दूसरे बाघ के साथ संघर्ष से जुड़ा माना जा रहा है। वन विभाग पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कर रहा है। बताया जा रहा है कि ‘पुजारी’ नाम का यह बाघ लंबे समय से अपने इलाके में सक्रिय था। हाल के दिनों में उसका सामना ‘B1’ नाम के दूसरे बाघ से हो रहा था। अधिकारियों को आशंका है कि इसी संघर्ष के दौरान बाघ गंभीर रूप से घायल हुआ होगा। दोनों बाघों के बीच क्षेत्र पर कब्जे को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई थी।

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    बांधवगढ़ इलाके की लड़ाई में बाघ की मौत की आशंका, वन विभाग जांच में जुटा

    वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर सबूत जुटाने शुरू कर दिए हैं। बाघ के शव के आसपास संघर्ष के निशान मिलने की बात कही जा रही है। अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि की जा सके। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में बाघ पाए जाते हैं, जिसके कारण कई बार उनके बीच क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल में अपने इलाके को सुरक्षित रखने के लिए बाघ अक्सर एक-दूसरे से भिड़ जाते हैं। वन अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल किसी बाहरी हमले या शिकार की संभावना नजर नहीं आई है।

    शुरुआती जांच में यह मामला प्राकृतिक संघर्ष का लग रहा है। हालांकि विभाग हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच कर रहा है ताकि किसी भी संभावना को नजरअंदाज न किया जाए। बाघ ‘पुजारी’ की मौत के बाद वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। रिजर्व प्रबंधन ने कहा है कि इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है और अन्य बाघों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जंगल में वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या को संरक्षण की सफलता माना जाता है, लेकिन इसके साथ क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों के लिए पर्याप्त क्षेत्र और संसाधन सुनिश्चित करना जरूरी है। वन विभाग अब इस घटना से जुड़े सभी तथ्यों को जुटाने में लगा हुआ है।

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