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    दक्षिण

    दक्षिण भारत में लोकसभा सीटों के संभावित नुकसान को लेकर उठी आशंकाओं पर सरकार ने लोकसभा में स्थिति स्पष्ट की। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के संदर्भ में कहा गया कि परिसीमन से किसी भी दक्षिणी राज्य को नुकसान नहीं होगा। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने बताया कि हर राज्य में करीब 50 फीसदी सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव सभी के साथ संतुलित और न्यायपूर्ण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला जनसंख्या संतुलन और प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर लिया गया है। सरकार का कहना है कि नए परिसीमन से पूरे देश में समान भागीदारी सुनिश्चित होगी और किसी क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

    तेजस्वी सूर्या ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित परिसीमन 2011 या नई जनगणना के आधार पर नहीं, बल्कि 2002 के परिसीमन में सीधे 50 प्रतिशत वृद्धि के रूप में किया जाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केरल की मौजूदा 20 सीटें जनगणना आधारित परिसीमन में घट सकती थीं, लेकिन नए प्रस्ताव से ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी राज्य का नुकसान न हो और सभी का प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहे। गृह मंत्री अमित शाह ने भी भरोसा दिलाया कि इस फैसले में सभी राज्यों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है।

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    दक्षिण राज्यों को नुकसान नहीं, सीटें बढ़ेंगी

    सरकार ने मौजूदा व्यवस्था में केरल की लोकसभा सीटें बढ़ाकर 30 करने का प्रस्ताव रखा है। तेजस्वी सूर्या ने कहा कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होता तो तमिलनाडु की सीटें 39 से घटकर 49 तक सीमित हो सकती थीं, लेकिन अब 59 सीटों का प्रस्ताव है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे को समझने के बजाय केवल विरोध कर रहा है। सूर्या के मुताबिक, नए प्रस्ताव में केरल को भी फायदा हुआ है, जहां सीटें बढ़ाई गई हैं, जबकि आंध्र प्रदेश को भी अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की बात कही गई है।

    तेजस्वी सूर्या ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन के बाद भी दक्षिण भारत के राज्यों का लोकसभा में हिस्सा लगभग 23.9 फीसदी ही रहेगा, यानी अनुपात में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इस मुद्दे पर अनावश्यक विवाद और भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने तमिलनाडु में बिल की कॉपी फाड़े जाने की घटना की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक नाटक बताया। ए. राजा को संबोधित करते हुए सूर्या ने कहा कि वे भी उतने ही दक्षिण भारतीय हैं, लेकिन अलगाववादी सोच के बजाय पूरे देश को एक समान मानते हैं।

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