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    IMFWASHINGTON DC, UNITED STATES - APRIL 19: In this photo International Monetary Fund (IMF) logo is seen in Washington D.C., United States on April 19, 2024. (Photo by Celal Gunes/Anadolu via Getty Images)

    वैश्विक आर्थिक हालात को लेकर एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने अपनी ताज़ा ‘फिस्कल मॉनिटर’ रिपोर्ट में आशंका जताई है कि मौजूदा रुझान जारी रहे तो 2029 तक सरकारी कर्ज दुनिया की कुल GDP के 100% तक पहुंच सकता है। ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि 2025 में ही वैश्विक कर्ज GDP के करीब 94% तक पहुंच चुका है। आने वाले वर्षों में इसमें और बढ़ोतरी होने की संभावना है। साफ संकेत है कि दुनिया जितनी कमाई करेगी, लगभग उतना ही कर्ज बकाया रहेगा।

    इतिहास बताता है कि इतना ऊंचा कर्ज स्तर आखिरी बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद देखने को मिला था। उस दौर में युद्ध और पुनर्निर्माण पर भारी खर्च ने देशों को कर्ज के जाल में फंसा दिया था। करीब 80 साल बाद हालात फिर उसी स्तर की ओर बढ़ते दिख रहे हैं, हालांकि इस बार चुनौतियां ज्यादा जटिल हैं।

    कर्ज बढ़ने के मुख्य कारण

    सबसे बड़ी वजह अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने तेल और गैस की कीमतें बढ़ा दीं। सरकारें जनता को राहत देने के लिए सब्सिडी बढ़ा रही हैं और इसके लिए उन्हें उधार लेना पड़ रहा है।

    महंगाई और ऊंची ब्याज दरों ने भी दबाव बढ़ाया है। केंद्रीय बैंकों ने महंगाई नियंत्रित करने के लिए दरें बढ़ाईं, जिससे कर्ज की लागत महंगी हो गई। अब सरकारों को पुराने कर्ज पर ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ रहा है और नया कर्ज लेना भी महंगा पड़ रहा है। वैश्विक GDP में ब्याज भुगतान का हिस्सा 2% से बढ़कर 3% तक पहुंच चुका है।

    लगातार बढ़ते बजट घाटे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कई देशों की आमदनी कम है, जबकि खर्च ज्यादा है। इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकारें लगातार उधार ले रही हैं।

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    विकासशील देशों पर ज्यादा असर

    कमजोर अर्थव्यवस्थाएं इस दबाव को ज्यादा महसूस करेंगी। तेल आयात पर निर्भर और पहले से आर्थिक संकट झेल रहे देशों के लिए कर्ज चुकाना और कठिन हो सकता है। इससे वित्तीय अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है।

    क्या कहता है IMF

    संस्था ने देशों को सलाह दी है कि वे खर्च पर नियंत्रण रखें, लक्षित सब्सिडी दें और दीर्घकालिक कर्ज प्रबंधन की ठोस रणनीति बनाएं।

    भारत के लिए संकेत

    इन वैश्विक चुनौतियों के बीच IMF ने भारत को ‘ब्राइट स्पॉट’ बताया है। मजबूत आर्थिक वृद्धि और नियंत्रित प्राथमिक खर्च ने भारत की राजकोषीय स्थिति को अपेक्षाकृत स्थिर रखा है। आने वाले समय में कर्ज-GDP अनुपात में स्थिरता या गिरावट की उम्मीद जताई गई है।

    वर्तमान में भारत का कर्ज-GDP अनुपात करीब 84% है। अनुमान बताते हैं कि 2031 तक अमेरिका का कर्ज उसकी GDP के 142% तक पहुंच सकता है, जबकि चीन का कर्ज 127% तक जा सकता है।

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