ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब और गंभीर रूप लेता जा रहा है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 दिनों तक ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला न करने की बात कही है, लेकिन तेहरान को इस आश्वासन पर भरोसा नहीं है। इसलिए, ईरान ने अपना रुख सख्त करते हुए नए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं।
इसी बीच, ईरान ने घोषणा की है कि वह पश्चिम एशिया के उन होटलों को निशाना बनाएगा जहां अमेरिकी सैनिक ठहरे हैं। सेना के अनुसार, ऐसे सभी स्थान अब उसके लिए वैध सैन्य लक्ष्य माने जाएंगे। साथ ही, होटल मालिकों को चेतावनी दी गई है कि वे अमेरिकी सैनिकों को ठहरने की अनुमति न दें। इस अल्टीमेटम के बाद क्षेत्र में डर और अनिश्चितता बढ़ गई है।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी सैनिक अपने सैन्य अड्डों को छोड़कर नागरिक इलाकों, जैसे होटल और दफ्तरों में छिप रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को ‘मानव ढाल’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने होटल संचालकों से अपील भी की कि वे अमेरिकी सैनिकों को जगह न दें।
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ईरान ने बदला निशाना, अमेरिकी सैनिकों वाले होटलों को बनाया टारगेट
दूसरी ओर, ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता अबोलफज़ल शेकरची ने स्पष्ट किया कि जहां भी अमेरिकी सैनिक मौजूद होंगे, वह स्थान लक्ष्य माना जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ईरान बिना प्रतिक्रिया दिए हमलों का इंतजार करे। उनके अनुसार, जवाबी कार्रवाई उन्हीं जगहों पर होगी जहां अमेरिकी बल मौजूद हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरिया, लेबनान और जिबूती में भी ऐसे ठिकानों की पहचान की गई है।
इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” की 83वीं लहर शुरू करने का दावा किया है। इस अभियान में इजरायल और अमेरिका से जुड़े कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। हमलों में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। आगे भी ऐसे अभियान जारी रहने के संकेत दिए गए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
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