डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन को पुलिस ने करीब 90 मिनट की पूछताछ के बाद आखिरकार रिहा कर दिया। रिहाई के बाद स्टालिन ने राज्य सरकार पर मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसान समुदाय ने उनके विरोध प्रदर्शन और भाषण को जबरदस्त समर्थन दिया था। स्टालिन के मुताबिक, किसानों के बीच बढ़ते समर्थन ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा बहस से पहले मुद्दे को दबाने की कोशिश की। स्टालिन ने दावा किया कि पुलिस ने उनके भाषण का कट-एंड-पेस्ट वीडियो प्रसारित किया। उन्होंने कहा कि वीडियो में उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था। स्टालिन के अनुसार, मीडिया संस्थानों तक भी कथित तौर पर वही संपादित वीडियो पहुंचाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हीं दावों के आधार पर उनकी गिरफ्तारी की।
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कावेरी विवाद पर बयान से बढ़ा सियासी घमासान, पूछताछ के बाद स्टालिन रिहा
स्टालिन ने कहा कि उन्होंने पुलिस की कार्रवाई में पूरा सहयोग किया और कोई विरोध नहीं किया। उन्होंने गिरफ्तारी के दौरान पत्रकारों से पूरी घटना को बेतुका बताया था। स्टालिन ने आरोप लगाया कि सरकार उन्हें उन बातों के लिए निशाना बना रही थी। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई उन्हें डराने या चुप कराने में सफल नहीं होगी। स्टालिन ने अपने राजनीतिक परिवार और डीएमके की विचारधारा का हवाला देकर चुनौती स्वीकार की। उन्होंने कहा कि वह किसी भी दबाव से डरने वाले नहीं हैं और संघर्ष जारी रखेंगे।
पूरा विवाद कावेरी जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु में आयोजित सभा के बाद शुरू हुआ। तंजावुर में सभा के दौरान स्टालिन ने मुख्यमंत्री पर कावेरी मुद्दे को लेकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु को कावेरी नदी का पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। स्टालिन ने मुख्यमंत्री पर इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। सभा के दौरान समर्थकों ने नारे लगाए, जिसके बाद स्टालिन की टिप्पणी विवादों में घिर गई। विरोधियों ने उनकी टिप्पणी को आपत्तिजनक बताते हुए उसके अलग-अलग अर्थ निकाले। इसके बाद राजनीतिक विवाद बढ़ा और पुलिस ने मंगलवार सुबह स्टालिन को हिरासत में लिया। पूछताछ पूरी होने के बाद पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया और विवाद फिर चर्चा में आया।

