यूपी में पेट्रोल, डीजल और LPG की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर सख्त कार्रवाई शुरू की है। 12 मार्च से अब तक राज्यभर में 17 हजार से अधिक छापेमारी और निरीक्षण किए गए हैं। इस दौरान 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य सप्लाई को सुचारू बनाए रखना है। साथ ही अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाना भी मुख्य लक्ष्य है।
इन छापों के दौरान कई मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स के खिलाफ 33 और अन्य मामलों में 189 एफआईआर दर्ज हुई हैं। इसके अलावा 224 लोगों के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। कानून तोड़ने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है।
मुख्य सचिव के निर्देश के बाद सभी जिलों में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। जिला आपूर्ति अधिकारी और स्थानीय प्रशासन लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को समय पर ईंधन और गैस उपलब्ध कराना है। साथ ही सप्लाई चेन को बाधित होने से बचाना भी प्राथमिकता है। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया जा रहा है।
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यूपी में ईंधन कालाबाजारी पर सख्ती: हजारों छापे, सप्लाई सामान्य
सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है और पेट्रोल पंप सुचारू रूप से काम कर रहे हैं। हाल के दिनों में ईंधन की बिक्री सामान्य रही है। इससे मांग और सप्लाई के बीच संतुलन बना हुआ है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई है।
सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और अनावश्यक भंडारण से बचें। LPG की सप्लाई भी पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए समय पर सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। गैस नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए भी प्रयास जारी हैं। इससे भविष्य में सप्लाई और बेहतर होने की उम्मीद है।
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