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    एशिया कप: संजू पर जितेश को तरजीह, स्ट्राइक-रेट बना बड़ा कारण

    एशिया कप

    मिडिल ऑर्डर में जितेश की मजबूत दावेदारी

    आंकड़ों के आधार पर यह साफ दिखता है कि मिडिल ऑर्डर में जितेश शर्मा की दावेदारी संजू सैमसन से कहीं अधिक मजबूत है। भले ही संजू सैमसन का अनुभव बड़ा हो और उन्हें लंबे समय से टीम इंडिया के लिए मौके मिलते रहे हों, लेकिन टीम के मौजूदा हालात और रणनीति को देखते हुए जितेश ज्यादा तार्किक विकल्प साबित हो सकते हैं। भारतीय टीम एशिया कप जैसे टूर्नामेंट में आक्रामक क्रिकेट खेलना चाहती है और निचले क्रम में ऐसे बल्लेबाज की जरूरत होती है जो आते ही तेजी से रन बना सके। इस लिहाज से जितेश का स्ट्राइक रेट और फिनिशिंग क्षमता उन्हें टीम संयोजन में अहम खिलाड़ी बना सकती है।

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    एशिया कप: अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल प्रदर्शन का विश्लेषण

    अगर अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों पर नजर डालें तो संजू सैमसन ने अब तक 38 टी20 पारियों में 861 रन बनाए हैं, उनका स्ट्राइक रेट 152.39 का है। हालांकि, जब बात आती है मिडिल ऑर्डर यानी पांचवें और छठे नंबर की, तो उनका प्रदर्शन फीका नजर आता है। पांचवें नंबर पर उन्होंने केवल 62 रन बनाए हैं और स्ट्राइक रेट 131.91 रहा है। छठे नंबर पर तो उन्होंने सिर्फ एक पारी खेली है, जिसमें 12 रन बनाए और स्ट्राइक रेट मात्र 100 रहा। इसके विपरीत, जितेश शर्मा ने भले ही अब तक सिर्फ सात अंतरराष्ट्रीय पारियां खेली हों और 100 रन बनाए हों, लेकिन उनका स्ट्राइक रेट 147.06 का रहा है। खासकर छठे नंबर पर उन्होंने 64 रन बनाए और स्ट्राइक रेट 152.38 दिखाया, जो सैमसन से बेहतर है। यही कारण है कि चयनकर्ता उन्हें लोअर ऑर्डर का बेहतर फिनिशर मान रहे हैं।

    आईपीएल के आंकड़ों में तस्वीर और साफ हो जाती है। जितेश शर्मा ने आईपीएल की 47 पारियों में 991 रन बनाए हैं। उनका औसत 25.41 और स्ट्राइक रेट 157.05 का है, जो शानदार माना जाता है। छठे नंबर पर उन्होंने 16 पारियों में 405 रन बनाए और उनका औसत 31.15 तथा स्ट्राइक रेट 168.75 रहा है। यह साबित करता है कि वह इस पोजिशन पर फिनिशर की भूमिका को बखूबी निभा सकते हैं। दूसरी ओर, संजू सैमसन ने आईपीएल में 172 पारियों में 4704 रन बनाए हैं और उनका औसत 30.95 और स्ट्राइक रेट 139.05 का है। लेकिन उनका शानदार प्रदर्शन ज्यादातर नंबर-तीन पर देखने को मिला है। वहीं, नंबर पांच और छह पर उनका औसत और स्ट्राइक रेट दोनों गिर जाते हैं। यानी लोअर मिडिल ऑर्डर में उनकी चमक उतनी दिखाई नहीं देती जितनी जितेश की।

    टीम चयन की अंतिम चुनौती

    एशिया कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में लोअर मिडिल ऑर्डर का रोल बेहद महत्वपूर्ण होता है। टीम मैनेजमेंट को ऐसे बल्लेबाज की जरूरत है जो कुछ ही गेंदों में मैच का रुख बदल दे या तुरंत बड़े शॉट लगाकर रन गति को बनाए रखे। यही कारण है कि चयनकर्ता और कोचिंग स्टाफ स्ट्राइक रेट को ज्यादा अहमियत देते हैं। संजू सैमसन तकनीकी रूप से भले ही ज्यादा सॉलिड बल्लेबाज हों, लेकिन मिडिल ऑर्डर में जितेश शर्मा का निडर अंदाज और लगातार स्ट्राइक रोटेट करने की क्षमता टीम इंडिया के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है।

    अब सबसे बड़ी चुनौती टीम मैनेजमेंट के सामने है—क्या वे अनुभव को तरजीह देंगे और सैमसन को मौका देंगे, या फिर टीम की आक्रामक रणनीति को देखते हुए जितेश शर्मा को प्लेइंग-11 में शामिल करेंगे। उप-कप्तान शुभमन गिल और अभिषेक शर्मा के ओपनिंग की संभावना मजबूत है, जबकि सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा तीसरे और चौथे नंबर पर बैटिंग करेंगे। ऐसे में विकेटकीपर-बल्लेबाज के स्लॉट पर असली टक्कर सैमसन और जितेश के बीच है। सूर्यकुमार यादव और टीम मैनेजमेंट अगर आक्रामक ब्रांड क्रिकेट को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो निचले क्रम में जितेश शर्मा का चयन ज्यादा उपयुक्त दिखाई देता है।

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