मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश किए।विधेयक के तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आरोप लगने पर इस्तीफा देना होगा।अगर कोई व्यक्ति 5 साल से अधिक सजा वाले केस में 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहे।विधेयक पेश करते समय विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया और विरोध जताया विपक्ष ने विधेयक की प्रतियां फाड़कर अमित शाह की तरफ फेंकीं और नारे लगाए।
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राजनीति में जवाबदेही और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया अहम विधेयक: अमित शाह
अमित शाह ने विपक्ष के विरोध के बीच अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा।उन्होंने कहा कि राजनीति में शुचिता बनाए रखना बेहद जरूरी है और जिम्मेदारी निभानी चाहिए।उन्होंने खुद गुजरात में मंत्री रहते हुए आरोप लगने पर इस्तीफा दिया था।शाह ने कहा कि कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए उन्होंने पद छोड़ा था।जब वह आरोपों से बरी हुए तो उन्होंने फिर से जिम्मेदारी संभाली।अमित शाह ने कहा कि सभी नेताओं को ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी निभानी चाहिए।यह विधेयक मंत्रियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।
विधेयक के अनुसार, गंभीर आरोपों में फंसे मंत्री 30 दिनों में पद छोड़ेंगे।इस कदम से राजनीतिक प्रणाली में पारदर्शिता और साफ़गोई बढ़ेगी।सरकार का लक्ष्य है कि जनता का विश्वास मजबूत रहे और भ्रष्टाचार घटे।इस विधेयक पर संसद में अभी भी बहस और विवाद जारी है।अमित शाह ने अपनी बात मजबूती से रखी और विपक्ष को समझाने की कोशिश की।उन्होंने कहा कि राजनीति में ईमानदारी और न्याय का पालन जरूरी है।यह विधेयक देश मेंराजनीतिक स्वच्छता और जिम्मेदारी का संदेश देगा।संसद में इस बिल को लेकर गंभीर बहस और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं।
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