मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद को लेकर इस साल बड़ी देरी सामने आई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। राज्य सरकार ने पहले 1 अप्रैल से खरीद शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दिया गया। सरकार ने इस देरी के पीछे ईरान युद्ध के कारण बारदाने की कमी को वजह बताया है। हालांकि, कई विशेषज्ञ इस तर्क से सहमत नहीं हैं और इसे नीति से जुड़ा फैसला मानते हैं। देरी के चलते किसान खुले बाजार में MSP से कम दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हो रहे हैं। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान न मिलने से उनका पूरा आर्थिक चक्र प्रभावित होता है। यह स्थिति राज्य में कृषि व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
बारदाने की कमी या नीति का खेल?
सरकार ने गेहूं खरीद में देरी का कारण बारदाने की कमी को बताया है। जूट और HDPE बैग की सप्लाई पेट्रोकेमिकल उद्योग पर निर्भर करती है। अधिकारियों का कहना है कि ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी वजह से पर्याप्त बैग समय पर उपलब्ध नहीं हो पाए। सरकार ने नए बैग खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही पुराने बैगों के उपयोग की भी योजना बनाई जा रही है। हालांकि, कई विशेषज्ञ इस तर्क को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते हैं। उनका मानना है कि सरकार जानबूझकर खरीद को सीमित करना चाहती है। वे कहते हैं कि ज्यादा गेहूं खरीदने से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ता है। इसलिए देरी एक रणनीति हो सकती है। कुछ जानकार इसे केंद्रीकृत खरीद मॉडल लागू करने की दिशा में कदम भी मानते हैं। इससे भविष्य में जिम्मेदारी केंद्र पर डाली जा सकती है।
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किसानों को MSP से कम दाम पर बेचने की मजबूरी
खरीद में देरी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। किसान अपनी फसल को MSP से कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। कई मंडियों में गेहूं 2000 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। जबकि सरकार ने MSP 2585 रुपये तय किया है। इससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह अंतर उनकी आय को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। किसानों को तुरंत नकदी की जरूरत होती है। उन्हें खेती के खर्च और कर्ज चुकाने होते हैं। देरी के कारण उनका पूरा आर्थिक चक्र बिगड़ रहा है। कई किसान मजबूरी में कम दाम पर सौदा कर रहे हैं। इससे उनकी बचत खत्म हो रही है। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डाल सकती है।
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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बढ़ा विवाद
इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल भी गरम हो गया है। विपक्ष ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। उनका कहना है कि सरकार जानबूझकर खरीद में देरी कर रही है। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। दूसरी ओर, सरकार ने सभी आरोपों को खारिज किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि तय तारीख पर खरीद शुरू होगी। अधिकारियों ने भी कहा कि बारदाने की व्यवस्था तेजी से की जा रही है। लेकिन स्लॉट बुकिंग में देरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर 10 अप्रैल पर टिकी है।

