ईरान ने हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे को निशाना बनाते बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव के संकेत मिले।
हालांकि मिसाइलें अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन इसराइल डिफ़ेंस फोर्स ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार इतनी लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ है।
अब विशेषज्ञ इस असफल हमले के असर और संभावित लक्ष्यों की सीमा पर इसके प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भविष्य में बर्लिन, पेरिस और लंदन जैसे यूरोपीय शहर ईरान की पहुंच में आ सकते हैं।
मिसाइल हमले से बढ़ा तनाव, ईरान की लंबी दूरी की क्षमता पर सवाल
ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर चिंताओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी थी और आगे भी वार्ता की संभावना बनी हुई थी, लेकिन इसी बीच इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला शुरू कर दिया।
ईरान से करीब 3,800 किलोमीटर दूर स्थित चागोस द्वीपसमूह, जिसमें डिएगो गार्सिया शामिल है, इस घटनाक्रम का अहम केंद्र बना।
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ और सीएनएन ने अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, हालांकि कोई भी हथियार अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका।
घटना के तुरंत बाद, इसराइल डिफेंस फ़ोर्स ने दावा किया कि अब यूरोप, एशिया और अफ्रीका के कई शहर खतरे की जद में आ सकते हैं और उसने यह भी कहा कि ईरान ऐसी क्षमताओं वाली मिसाइलें विकसित करने की योजना पहले ही जाहिर कर चुका था।
मिसाइल रेंज क्षमता को लेकर बढ़ी चिंता
अमेरिकी अधिकारियों ने लंबे समय से आरोप लगाया है कि ईरान अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के जरिए ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिससे वह अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें बना सके।‘टाइम्स ऑफ़ इसराइल’ के अनुसार, जरूरत पड़ने पर ईरान इस तकनीक का उपयोग कर सकता
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