नई दिल्ली। साल 2012 में जेईई परीक्षा का परिणाम जब सामने आया और नाम के आगे ‘फेल’ गूगल लिखा दिखा, तो अभिजय अरोड़ा के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था। उन्हें लगा जैसे उनके सारे सपने एक पल में टूट गए। खासकर अपनी मां के संघर्ष और त्याग को देखते हुए यह असफलता उन्हें भीतर तक तोड़ गई।
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अभिजय की मां ने अकेले ही अपने बच्चों की परवरिश की थी और उनकी पढ़ाई के लिए हर संभव कोशिश की थी। सुबह जल्दी उठना, हर परीक्षा में उनका साथ देना और लगातार मेहनत के लिए प्रेरित करना—इन सबका असर अभिजय पर गहराई से था। ऐसे में असफलता का बोझ उनके लिए और भी भारी हो गया था।
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और एक नए रास्ते की तलाश शुरू की। आईआईटी में चयन न होने के बाद उन्होंने IIIT बैंगलोर में दाखिला लिया। वहां उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की और एक हैकाथॉन जीतकर विदेश में नौकरी हासिल की। इसके बावजूद उनके मन में कुछ बड़ा करने की चाह बाकी थी।
जेईई में असफलता और कर्ज के बावजूद मेहनत से हासिल की बड़ी सफलता
गूगल में काम करने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने बड़ा जोखिम उठाया और लगभग 1 करोड़ रुपये का लोन लेकर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का रुख किया। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपनी सीमाओं को चुनौती देने का ठान लिया था।
हार्वर्ड से पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने सबसे कठिन दौर आया। उनके पास नौकरी पाने के लिए सीमित समय था और लगातार आवेदन करने के बावजूद उन्हें केवल अस्वीकृति ही मिल रही थी। इस मुश्किल समय में उनकी पत्नी ने उनका पूरा साथ दिया और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।
जब पारंपरिक तरीके काम नहीं आए, तो अभिजय ने खुद एक एआई आधारित टूल तैयार किया। इस टूल की मदद से उन्होंने अपने रिज्यूमे को बेहतर बनाया और सोशल मीडिया पर अपनी स्किल्स दिखाना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके काम ने लोगों का ध्यान खींचा और आखिरकार उन्हें यूट्यूब में प्रोडक्ट मैनेजर की भूमिका मिल गई।
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आज अभिजय अरोड़ा न सिर्फ एक बड़ी टेक कंपनी में काम कर रहे हैं, बल्कि उनकी कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। अपनी मां और पत्नी के समर्थन को वे अपनी सफलता का सबसे बड़ा कारण मानते हैं और मानते हैं कि असफलता के बाद भी आगे बढ़ना ही असली जीत है।


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