केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षिक सत्र 2026-27 से स्कूली शिक्षा ढांचे में बड़े बदलाव लागू करने का ऐलान किया है। बोर्ड 9वीं और 10वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में व्यापक संशोधन कर रहा है, जिससे पढ़ाई को अधिक लचीला, व्यावहारिक और स्किल-आधारित बनाया जा सके।
अब 9वीं और 10वीं के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। पहले छात्र केवल हिंदी और अंग्रेजी जैसी दो भाषाएं पढ़ते थे, लेकिन नए नियमों के तहत तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। हालांकि यह व्यवस्था तुरंत लागू नहीं होगी, बल्कि इसकी शुरुआत कक्षा 6 से की जाएगी और 2031 तक 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा को अनिवार्य कर दिया जाएगा।
थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला का नया स्ट्रक्चर R1 R2 और R3 में विषय चयन की स्पष्ट व्यवस्था
CBSE ने थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला को R1, R2 और R3 स्ट्रक्चर में बांटा है।
R1 के तहत छात्र बोर्ड द्वारा जारी सूची में से कोई एक भाषा चुन सकेंगे।
R2 भाषा R1 से अलग होगी।
R3 भाषा R1 और R2 दोनों से अलग रखी जाएगी।
बोर्ड ने मुख्य विषयों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। छात्रों पर मानसिक दबाव कम करने के लिए मैथ्स के साथ-साथ अब साइंस में भी दो स्तर लागू किए जाएंगे। मैथ्स में पहले से बेसिक और स्टैंडर्ड लेवल की व्यवस्था है, और अब इसी तर्ज पर साइंस में भी लेवल सिस्टम लागू किया जाएगा।
आर्ट वोकेशनल और एआई पर जोर छात्रों को मिलेगी स्किल आधारित और करियर केंद्रित शिक्षा
इसके अलावा 9वीं और 10वीं के करिकुलम में आर्ट एजुकेशन, वोकेशनल एजुकेशन और फिजिकल एजुकेशन को अनिवार्य किया गया है। आर्ट और फिजिकल एजुकेशन का आंतरिक मूल्यांकन होगा, जबकि वोकेशनल एजुकेशन को शैक्षिक सत्र 2027-28 से औपचारिक मूल्यांकन के साथ अनिवार्य विषय बनाया जाएगा। बोर्ड ने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है।
इन बदलावों से छात्रों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि नए स्किल्स सीखने का भी अवसर मिलेगा। जो छात्र आगे चलकर साइंस के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें इससे विशेष लाभ होगा। साथ ही छात्र अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार विषयों का चयन भी कर सकेंगे।
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