क्षेत्रीय तनाव के बीच इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करने की योजना पर काम शुरू किया है, जिसके तहत करीब 6 लाख विस्थापित लोगों की वापसी पर रोक लगाई जा सकती है। उग्रवादी संगठन Hezbollah के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के बीच बड़ी संख्या में लोग पहले ही पलायन कर चुके हैं। इस बीच, रक्षा मंत्री Israel Katz ने संकेत दिया है कि सेना इलाके में एक “सिक्योरिटी ज़ोन” बनाने की तैयारी में है, जिससे हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर नजर रखने और पूरे क्षेत्र में निगरानी मजबूत करने का लक्ष्य है।
इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी सीमा से लेकर लितानी नदी तक के करीब 30 किलोमीटर क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करने की योजना बना रहा है, जिससे एक बड़े इलाके पर कब्जे की मंशा जाहिर होती है। रक्षा मंत्री Israel Katz के अनुसार, इस क्षेत्र से पलायन कर चुके लगभग 6 लाख लोगों की वापसी तब तक नहीं होगी जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते। इसके साथ ही सीमा से सटे घरों को ध्वस्त करने की बात भी कही गई है। Hezbollah के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए इजरायल ने Iran–Israel conflict escalation 2026 के बाद से हमले बढ़ा दिए हैं, क्योंकि इस संगठन को ईरान समर्थित उग्रवादी समूह माना जाता है।
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Beirut समेत दक्षिणी लेबनान पर हमले, लाखों लोग हुए बेघर
Hezbollah के खिलाफ अभियान तेज करते हुए इजरायल ने लेबनान की राजधानी Beirut सहित दक्षिणी क्षेत्रों में व्यापक हमले किए हैं, जिनमें अब तक करीब 1,250 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। इनमें से करीब 6 लाख लोग उसी इलाके से हैं, जिस पर इजरायल कब्जा करने की योजना बना रहा है। तनाव की शुरुआत Ali Khamenei की मौत के बाद हुई, जब हिजबुल्लाह ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल पर हमले किए, जिसके बाद इजरायल ने लेबनान में सैन्य अभियान तेज कर दिया। हिजबुल्लाह के साथ-साथ Houthi movement और Hamas को भी ईरान समर्थित उग्रवादी संगठनों के रूप में देखा जाता है।
Houthi movement का आधार यमन में है, जबकि Hezbollah लेबनान में सक्रिय है और Hamas लंबे समय से गाजा पट्टी में मौजूद है। इजरायल इन तीनों संगठनों को ईरान समर्थित खतरे के रूप में देखते हुए लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है। हिजबुल्लाह के अनुसार, उसने इस संघर्ष के दौरान इजरायल के 44 ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें 10 सैनिकों की मौत हुई। वहीं Israel Defense Forces का दावा है कि हिजबुल्लाह ने करीब 5,000 रॉकेट दागे, साथ ही ड्रोन और मोर्टार हमलों के जरिए भी लगातार हमले किए गए।
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