अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान से जुड़ा मौजूदा युद्ध अगले दो हफ्तों में खत्म हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही संघर्ष जल्दी थम जाए, लेकिन इससे पैदा हुआ ऊर्जा संकट इतनी जल्दी खत्म नहीं होगा और इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है।
ट्रंप ने यह भी कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोले बिना भी युद्ध समाप्त हो सकता है। ऐसे में आशंका है कि युद्ध के बाद भी तेल और गैस की सप्लाई बाधित रह सकती है। समुद्र में फंसे टैंकरों का प्रभाव आने वाले समय में दिखेगा, जिससे वर्तमान स्थिति का पूरा असर अभी सामने आना बाकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि युद्ध दो हफ्तों में खत्म भी हो जाए, तब भी तेल उत्पादन और सप्लाई चेन को सामान्य होने में लगभग 6 से 8 हफ्ते लग सकते हैं। युद्ध के दौरान ऊर्जा ढांचे को जो नुकसान हुआ है, उसकी मरम्मत में भी समय लगेगा। छोटे नुकसान जल्दी सुधर सकते हैं, लेकिन बड़े प्रोजेक्ट्स को ठीक करने में महीनों या साल तक लग सकते हैं।
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ईरान युद्ध दो हफ्तों में खत्म होने के संकेत, लेकिन ऊर्जा संकट और सप्लाई चुनौतियां बरकरार
युद्ध के बाद समुद्र में बिछाई गई माइंस को हटाना और क्षतिग्रस्त जहाजों का मलबा साफ करना बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा शिपिंग लागत भी काफी बढ़ गई है, जो युद्ध के दौरान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। इन खर्चों के सामान्य होने में भी कुछ हफ्तों का समय लग सकता है।
अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। सप्लाई में हर अतिरिक्त रुकावट रिकवरी के समय को और बढ़ा देगी। भारत पर इसका असर फिलहाल सीमित है, लेकिन वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी और छोटे देशों में बढ़ती महंगाई इस संकट की गंभीरता को दिखाती है।
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