गृह मंत्री अमित शाह ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि नक्सलवाद की जड़ गरीबी या विकास की कमी नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। उन्होंने यह भी कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।
हालांकि, मंगलवार 31 मार्च को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अमित शाह के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकसभा में शाह का यह आरोप पूरी तरह गलत है कि उनकी सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ प्रयासों का समर्थन नहीं किया। बघेल ने इस मुद्दे पर अमित शाह को कभी भी, कहीं भी बहस की चुनौती दी और कहा कि राज्य और देश की जनता को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।
इससे पहले लोकसभा में “वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त करने के प्रयास” पर चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सरकार के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर नक्सलवाद सच में खत्म हो गया है और हालात सामान्य हो चुके हैं, तो फिर बस्तर में इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती क्यों जारी है।
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अमित शाह के दौर में बस्तर में नक्सल विरोधी रणनीति कैसे बदली?
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि 2014 के बाद सरकार ने माओवादियों के खिलाफ अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। उन्होंने बताया कि सुरक्षा मोर्चे पर सरकार ने 596 अतिरिक्त पुलिस थाने बनाए, सुरक्षाबलों के सैकड़ों नए कैंप स्थापित किए और ड्रोन, सैटेलाइट तथा डेटा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया।
अमित शाह ने यह भी कहा कि साल 2024 से 2026 के बीच देशभर में 706 नक्सली मारे गए, 2,218 को गिरफ्तार किया गया और 4,800 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया।
विकास के मोर्चे पर भी उन्होंने सरकार की प्रगति गिनाई। उनके मुताबिक, 17,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 12,000 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं। इसके अलावा, करीब 5,000 मोबाइल टावर लगाए गए और हज़ारों बैंक शाखाएं, एटीएम तथा पोस्ट ऑफिस खोले गए।
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