भारत सरकार ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने फ्रांसीसी सरकार को लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LOR) भेजाहै, जिससे करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस मेगा रक्षा सौदे का रास्ता खुल गया है। यह भारतीय वायु सेना के इतिहास का सबसे बड़ा फाइटर जेट खरीद कार्यक्रम माना जा रहा है।
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114 राफेल विमानों के सौदे में ‘मेक इन इंडिया’ को मिली बड़ी ताकत
इस सौदे की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘बाय ग्लोबल, मेक इन इंडिया’ मॉडल है। कुल 114 विमानों में से लगभग 22 से 24 राफेल जेट फ्रांस से पूरी तरह तैयार स्थिति में भारत आएंगे, जबकि शेष 90 से अधिक विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इससे वायु सेना को तत्काल आधुनिक लड़ाकू क्षमता भी मिलेगी और देश में रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। भारत में बनने वाले राफेल विमानों में कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी पुर्जों और तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, भारत को अपनी मिसाइल प्रणालियों जैसे अस्त्र और ब्रह्मोस को राफेल प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत करने की तकनीकी क्षमता भी प्राप्त होगी। यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।
राफेल निर्माण कार्यक्रम में कई भारतीय कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और डसॉल्ट एविएशन पहले ही फ्यूजलेज निर्माण के लिए साझेदारी कर चुके हैं। इसके अलावा, HAL, लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा डिफेंस और भारत फोर्ज जैसी कंपनियां भी विभिन्न कलपुर्जों और प्रणालियों के निर्माण में योगदान दे सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना भारत में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा करेगी। साथ ही, भारतीय वायु सेना की घटती स्क्वॉड्रन संख्या को मजबूत करने में मदद मिलेगी। राफेल की उन्नत रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्रणाली और लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताएं भारत की हवाई सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाएंगी।
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